PGI Warns: Smokeless Tobacco

PGI की चेतावनी: गुटखा-खैनी गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए बेहद खतरनाक

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PGI Warns: Smokeless Tobacco

Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGI) के डॉक्टरों ने गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य धुआं रहित तंबाकू उत्पादों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि लोग इन्हें सिगरेट से कम खतरनाक मानते हैं, जबकि ये मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं।

PGI के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार गर्भावस्था के दौरान तंबाकू का सेवन करने से बच्चे का वजन कम होना, समय से पहले जन्म और मृत बच्चे के जन्म (स्टिलबर्थ) का खतरा बढ़ जाता है। संस्थान के मुताबिक भारत में करीब 20 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं।

Prof. Sonu Goel ने बताया कि लोग गुटखा और खैनी को सुरक्षित या “नेचुरल” समझते हैं, जबकि यह पूरी तरह गलत धारणा है। उन्होंने कहा कि तंबाकू में मौजूद निकोटीन, नाइट्रोसामाइन और अन्य जहरीले केमिकल सीधे कैंसर से जुड़े हुए हैं।

डॉक्टरों के अनुसार स्मोकलेस तंबाकू भारत में ओरल कैंसर के मामलों का एक बड़ा कारण बन चुका है। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक दुनिया में धुआं रहित तंबाकू और सुपारी से जुड़े करीब 70 प्रतिशत ओरल कैंसर के मामले भारत में पाए जाते हैं।

PGI ने बताया कि ऐसे तंबाकू उत्पादों में लगभग 4000 केमिकल्स होते हैं, जिनमें आर्सेनिक, लेड, कैडमियम, फॉर्मेल्डिहाइड और रेडियोएक्टिव पोलोनियम-210 जैसे खतरनाक तत्व शामिल हैं। इससे ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों ने युवाओं और महिलाओं में बढ़ती तंबाकू की लत पर चिंता जताते हुए कहा कि फ्लेवर्ड पान मसाला और छोटे पैक वाले गुटखा उत्पाद तेजी से किशोरों को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। PGI ने लोगों से तंबाकू छोड़ने के लिए सरकारी हेल्पलाइन और डी-एडिक्शन सेवाओं का इस्तेमाल करने की अपील की है।